5 मार्च 2011

वक्त ना रुके ...

वो हमें राहों पर छोड़ गया तनहा ,
इंतजार करते हुए ...
सोचा था हम उसकी जरूरत है ,
उसके लिए जन्मों तक इंतज़ार करते रहेंगे .....
पर हर इब्तदा लेकर आती है एक इन्तेहा,
इससे वो नावाकिफ था ,
कदम रुक जाए ये होता है कभी कभी ,
ये नहीं मुमकिन की जिंदगी का वक्त रुक जाए .......
और हम लौट गए कहीं अनजान दुनिया में ,
जहाँ हमारे वजूद के निशाँ ना रह गए बाकी ,
अब गर लौट कर आये तो भी ,
यादों के धुंधले निशाँ को छोड़ कुछ ना मिलेगा ......

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