10 जनवरी 2011

इख्तियार ....

तुम पर ऐतबार है
खुद पर इख्तियार है ,
शायद ये कोई खुमार बेशुमार है ?
या फिर ये सिर्फ प्यार है ?
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कहीं मुक्कमल जहाँ की तलाश पर मंजिल है आज ,
वो एक जिसे राह से प्यार हुआ इस कदर उसे मिलने की बेताबी है आज ....
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जुर्म प्यार है या दिल का टूट जाना ...
शायद पुरे एहसास को झुठला देना ये ही एक गुनाह है ना !!!!!!!!!

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