22 अक्तूबर 2010

शरद पूर्णिमा ...

आज पूनमके चाँदको भी रात का इंतज़ार होगा ,
धरतीसे मिलने उसका दिल भी बेकरार होगा ...
तारोंकी बारात भी क्या खूब सजाकर लायेगा ,
सफ़ेद दूधकी धारामें नहाकर आता होगा ,
अपने पुरे रूपमें क्या वो दाग सजाता होगा ?
या उसकी माँ ने भी उसे नज़र का टिका लगाया होगा ????
आज छत पर लेटे लेटे देर तक तेरी चांदनी को पी लेंगे ,
धुपमें तपती रही इस रूहको शीतलता की चादर ओढा देंगे .......

4 टिप्‍पणियां:

  1. वाह! बहुत ही नेक ख्याल्……………सुन्दर प्रस्तुति।

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  2. माने भी उसे नज़र का टिका = माँ ने भी उसे नज़र का टीका


    -बहुत सुन्दर.

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