12 अक्तूबर 2010

दूर एक ख्याल बैठा मुस्करा गया ...

मन पंख लगाकर उड़ चला कहीं दूर ,
अब जिस्म क्या करेगा तनहा यूँ जीकर ?????
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कभी आंसू की बूंद को सूरज की किरणके सामने उंगली पर रख देखा है ?
उसने भी एक मेघ धनुष्य छुपा रखा है अपने अन्दर .....
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आज उल्ज़ी उल्ज़ीसी जुल्फोंको सुल्ज़ा रही थी वो खिड़कीमें आकर
और दूर एक ख्याल बैठा बैठा मुस्कुरा रहा था मेरे होठो पर ...

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