4 अक्तूबर 2010

टुकड़ा टुकड़ा ....

शायद तनहासे शायद अकेलेसे
दो पलके बीच छुपे वक्तसे हम ....
============================
ना मिलना तुमसे ये तय कर लिया
बस फासलेका एक बहाना बना लिया .....
==========================
बेमुरव्वत कभी ना था ये जहाँ किसी के लिए
कुछ कमी रह गयी हमारी कोशिशोंमें तुम्हे शिद्दतसे पा लेने की ....
===================================
ख्वाबोंके चंद टुकड़ो पर पल गया
एक हाथमें बचपन और दूजेमें जवानी लेकर
मेरी जिंदगीका एक टुकड़ा ......

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...