3 अक्तूबर 2010

सूखे पत्ते पे सवार

दिनके मंज़र पर रातका सवाल
खामोशसा खड़ा इंतज़ारमें है ,
वो चाँद आज किस रूपमें आएगा ???
पूरा खिला होगा या फिर रातके अँधेरे में छुप जाएगा ???
=======================================
सूखे पत्तेकी रगों में एक नज़्म मिली
एक दास्ताँ थी मोहब्बतकी बेजांसी
जिसमे महक इश्क की अभी भी बाकी थी ,
बस इक दीदार हो जाए तो वो हवाके साथ बह जाए ....!!!!

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...