26 सितंबर 2010

सुनो ....

हर सुबह कुछ कहती है ,
कानोमें फुसफुसाती है ,
धीरे से हंस देती है ,
फिर नाक चिढाती है ,
हर सुबह कुछ कहती है ..........
मीठी आवाजमें गुनगुनाती है ,
कभी शोर मचाती है ,
कभी चुप हो जाती है ,
कभी नगमे छोड़ जाती है ,
कभी आह बनकर सांस रोक जाती है ,
हर सुबह कुछ कह जाती है ...........
जाओ आज इतवार है ,
तुम कितना भी जोर लगा लो ,
आज मेरी भी जिद्द है तुम पर ,
कम्बलके नीचेसे सर नहीं निकलेगा ,
आज हर सपना पूरा होकर ही दम लेगा ,
बैठी रहना मेरी राह तकते,
मेरी इल्तजा सुनकर आज सुबह रुक जाती है ......

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