17 सितंबर 2010

वादा रहा ...

एक कोहरेसी धुंधली तेरी छवि
तेरी मुस्कानको ना हल्का कर पायी ,
तुम तो मुंह फेर कर चली गयी
फिर भी वादा खूब निभाती गयी
हर रात मेरे सिरहाने मेरा सपना बनकर आती रही .....

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