25 मार्च 2010

एक छोटी सी खता ...

कभी ऐतबार आ जाये खुद पर

बस एक खता कर लेना तुम भी ,

इश्क किया है हरदम तुमको ही जिसने ,

प्यार उससे भी कर लेना तुम भी .....

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एक काले अँधेरे साए के आंचलमें ,

हम बैठे रहे रात भर यूँही तनहा ही ,

शमा भी थी पास ,आतिश भी थी ,

पर ख्वाहिश पल रही थी दिलमे यही की

आयेंगे जब वो मिलने मुझसे ,

चराग को खुद ही रोशन करेंगे और उन्हीका दीदार होगा हमें भी ....

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तड़प थी इस पार भी

तड़प थी उस पार भी

ये भी नहीं था की ना थी नाव साहिल पर ,

और दरियामें भी भरपूर था पानी भी ,

पर बुत बनकर खड़े ही रहे हम ,

क्योंकि उनके आने का ऐतबार

अभी तलक ना कर पाया ये दिल .....

4 टिप्‍पणियां:

  1. कभी ऐतबार आ जाये खुद पर

    बस एक खता कर लेना तुम भी ,

    इश्क किया है हरदम तुमको ही जिसने ,

    प्यार उससे भी कर लेना तुम भी .....

    bahut sundar bhaav.

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत खूब !!!

    कभी अजनबी सी, कभी जानी पहचानी सी, जिंदगी रोज मिलती है क़तरा-क़तरा…
    http://qatraqatra.yatishjain.com/

    उत्तर देंहटाएं
  3. आयेंगे जब वो मिलने मुझसे ,

    चराग को खुद ही रोशन करेंगे और उन्हीका दीदार होगा हमें भी ....
    सुन्दर चित्रण मिलन व आस का।

    उत्तर देंहटाएं
  4. शमा भी थी पास ,आतिश भी थी ,

    पर ख्वाहिश पल रही थी दिलमे यही की

    आयेंगे जब वो मिलने मुझसे ,

    चराग को खुद ही रोशन करेंगे और उन्हीका दीदार होगा हमें भी ....

    क्या खूब भाव है दिल के । बहुत सुन्दर रचना । लाजवाब ।

    उत्तर देंहटाएं

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