11 फ़रवरी 2010

शय है खुबसूरत शायरी है प्यार एक ...

चलो अब प्यार का मौसम शुरू हो रहा है तो आज थोड़ी सैर मुग़ल युगमें कर के आते है .....

याद होगा आपको अभी तक मुगलेआज़म का गाना प्यार किया तो डरना क्या ...एक कनीज के प्यार के लिए तख्तोताज न्यौछावर करते सलीमके पिता शहेंशाह अकबर इस प्यार की सख्त खिलाफत करते है ...दोनों का प्यार जुदाईमें तब्दील हो जाता है ...एक अनारकली को जिन्दा चुनवा दी जाती है ...

इसी मुग़ल युग में शहेंशाह शाहजहाँ अपनी मुमताज़ बेगमके प्रति प्यार को जताने के लिए एक ताज महल बनवाया जिसका आज दुनिया के अजुबोमें शुमार होता है और जिसे प्यार का प्रतिक माना जाता है ...उसके बेटे औरंगजेब जो इन बातों के सख्त खिलाफ था और शाहजहाँकी जिंदगी के अंतिम दिनोंमें उसे आगरा के लाल किले मैं कैद कर देता है जहाँ के एक झरोखे से वो यमुना नदी के दुसरे किनारे पर बने ताज को देख सके .....

प्यार के ये दो रूप एक मुग़ल युग में .....

आज ये बात इस लिए याद आती है की वेलेंटाइन दिन के आते ही भारतीय संस्कृतिके नाम पर इसका विरोध करने की एक खास मुहीम भी हर साल छेद दी जाती है ...पर हमारे यहाँ पर एक विशेष प्रयोजन इसी ऋतू में किया गया है "वसंत पंचमी " का ...जो प्रेम पर्व है ...जिस दिन शादी के लिए उत्तम लग्न मुहूर्त भी माना गया है ...हमें इस दिन का महत्त्व नहीं पता ...क्या करें अब अंग्रेजी माध्यम के पढ़े लिखे हम इस देसी केलेंडर को क्या जाने ????तो हमें तो वेलेंटाइन दिन ही पता है ....

अब एक बात कहूँ : आपको नहीं लगता की प्यार का एहसास इन नामों से कई उचा है ...हमें प्यार को याद रखना है जो किसी दिन का मोहताज नहीं ...जब जिस वक्त आपका दिल किसीके लिए धड़क जाए ,जिसकी हर ख़ुशीमें ही हमें अपनी ख़ुशी नजर आने लग जाए वही हमारे लिए इजहार का दिन है चाहे उस दिन चौदह फरवरी हो या ना हो !!!

अगर आपके दिल में किसी के लिए भी ये जज्बा पनपता हो तो उसे एक बार कह ही दो ...बहुत बहुत तो येही होगा की वो इनकार करेगा ...शायद हो सकता है की वो भी अपना प्यार छुपा रहा हो ....इस दुनिया में हर चीज़ अब बिकाऊ हो चुकी है पर पहली पहली बार किसीके लिए दिल का धड़क जाना ये अनमोल ही है ...जिसे धर्म ,जात पात किसीका बंधन नहीं .......दुनिया में अगर आप समर्पण की भावना को लेकर जीते हो तो हर लम्हा ,हर दिन ,हर महिना ,हर साल और ये सारी जिंदगी आपके लिए प्यार का मौसम बन सकती है ....ये भावना बिकाऊ नहीं ...पैसो से कोई दुकान पर नहीं मिलती .....

5 टिप्‍पणियां:

  1. sahi kah rahi hain aap..........pyar sirf pyar hota hai .........sabhi bandishon se pare.

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  2. बहुत ही सुन्‍दर प्रस्‍तुति ।

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  3. ....दुनिया में अगर आप समर्पण की भावना को लेकर जीते हो तो हर लम्हा ,हर दिन ,हर महिना ,हर साल और ये सारी जिंदगी आपके लिए प्यार का मौसम बन सकती है ....ये भावना बिकाऊ नहीं ...पैसो से कोई दुकान पर नहीं मिलती .....
    Behad sundar!

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