8 फ़रवरी 2010

शुन्यवाकाश ...

आपने कभी खुदमें शुन्यवाकाश महसूस किया है ? किया होगा पर ये जो हमारी दौड़ती भागती जिंदगी है ना वो ये सोचने का वक्त नहीं देती ...या फिर उसे हम डिप्रेसन या फिर मूड ऑफ़ है कह देते है ....

कुछ करने मन ना हो ...सुबह में बिस्तर छोड़ने को मन ना हो ...कुछ काम करने को दिल ना करे ...दिमागमें कुछ ख्याल भी ना आये ...जाने सारे मंज़र थम गए हो ....बैठे तो बैठे रहे ...आसमां को तकते रहे ...नहीं नहीं जानती हूँ की प्यार का मौसम बड़े करीब है और ये निशानियाँ प्यार होने की निशानियों से बहुत मिलती झूलती है ...बट नो वे मैं प्यार की बात नहीं कर रही ......

जैसे काम करना , प्रवृतिमें मगन रहना , जीना -सांस लेना जैसे ही जरूरी है शुन्यवाकाश का होना ...तब जिंदगी रूकती है ...थमती है ... कोई नया ख्याल आता नहीं ...अगर आप कोई सर्जनात्मक क्षेत्रमें है तो आपकी ये शक्ति भी क्षीण होती नज़र आती है ...कोई नयी कहानी या कविता भी नहीं सूझती , अपने आपसे आप संतुष्ट नज़र नहीं आते ...पर कहते है की वक्त ठहरता नहीं है वैसे ये वक्त भी गुजर ही जाता है ...लेकिन ये वक्त हमारे भीतर को खाली कर देता है ..अपने पुराने विचारों को उसमेंसे निकाल के खाली करके साफ़ सफाई करने का ये वक्त है ...फिर नए विचार खुद ब खुद उसमें पनपने लगेंगे ...और एक नयी उर्जा आपमें संचारित हो जायेगी ...फिर नए विचार नए मूड से ये बदलाव से आप भी खुश रहोगे और आपके अपने भी .....

सच कहूँ तो इस ब्लॉग पर आने वाले भी महसूस कर रहे होंगे की अब मैं रोज पोस्ट नहीं लिख रही हूँ ...शायद मैं इसी दौर से गुजर रही हूँ ....कुछ भी लिख देना जिससे खुद को भी संतोष ना हो ..इस से बेहतर येही होगा की इस कलम को थोडा विराम दे दूँ .......खुद को जानने की ये चेष्टा है ..आज कल मैं पढ़ रही हूँ ...अखबारों की रद्दीमें से ज्ञानवर्धक विशिष्ट पूर्ति निकाल कर उसे पढ़ती हूँ ...वैसे आपको जानकार शायद आश्चर्य होगा की मैं वास्तविकतासे जुडी हकीकत पढने की शौक़ीन हूँ ...विज्ञानं की खोज के बारे में पढना अच्छा लगता है ...कल में लेनिन और माओ त्से तुंग के शव उनके देश में किस तरह सहेज के रखे गए है ...उसकी प्रक्रिया उसमे आई अड़चन ..उसके बारे में पढ़ रही थी ...और जब लिखती हूँ तब प्यार इश्क मोहब्बत की कल्पना उभरती है ....मेरी कल्पना जब खुद की जिंदगी की हकीकत में आमने सामने होती है उसका आनंद बयां नहीं हो सकता ...और ये सब मेरे शुन्यवाकाश की ही डेन है ...ऐसा लगता है कभी कभी की नयी दिशा को भी मेरी प्रतीक्षा है ...वहां से बेहतर फूल चुनकर ला सकूँ .....

3 टिप्‍पणियां:

  1. aisa waqt sabke jeevan mein aata hai aur aap uska sadupyog kar rahi hain ..........wakai iske baad behtreen prastuti hogi.

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  2. ऐसा लगता है कभी कभी की नयी दिशा को भी मेरी प्रतीक्षा है ...वहां से बेहतर फूल चुनकर ला सकूँ ...
    प्रतीक्षा है!

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