31 जनवरी 2010

चलो एक कार लें .....

कल टीवी देखते हुए एक नयी कार का इश्तिहार आया ...मेरी एक सहेलीने कहा ये अच्छी कार है ...सस्ती भी है ...ले लेनी चाहिए ..मैं उसका चेहरा देखने लगी .....क्यों ????

पता है मेरा घर बहुत सादगीसे सजा है ...उतना सब कुछ है जो सुकूनसे लिए जरूरी है ...इस लिए मुझे उसका सुजाव कुछ अनमना सा लगा ...

मैंने कहा अगर स्कूटर पर जाये तो मेरी ससुराल सिर्फ १५ मिनटमें पहुँच सकते है ...और मायके जाना होतो पच्चीस मिनट काफी है ...उस पर रोड पर प्रतिदिन बढ़ रहा ट्राफिक देखो ...अगर कार होती है तो हमें कितनी देर ट्राफिकजाममें फंस जाना पड़ता है पर ये छोटा सा स्कूटर एक चूहे की तरह छोटी गली से निकल कर शोर्टकटसे हमारी गति को रोकता नहीं ...जहाँ पर हमें जाना हो वहां से कहीं दूर कार पार्क करो और फिर बाज़ार जाकर सामान खरीदो ....तुम्हे नहीं लगता कार कुछ कमाल नहीं कर पाती ऐसे हालमें ...और अगर दुसरे शहर जाना हो तो कुछ रुपये प्रति लीटरसे टेक्सी मिल जाती है ...तो ये सफ़ेद हाथी मैं क्यों पालू ??ऊपर से जंगल की आगसे बढ़ते हुए पेट्रोल के दाम !!!!! बेंकसे लोन लेकर इसे ले तो ले पर फिर किश्तें चुकाते हमारे रोजमर्रा के कितने खर्चे पर कहाँ पर कटौती कर पाएंगे ???? अब तीन चार साल के बाद बेटी का ब्याह करना हो तो ये रकम काम आ सकती है ...

बस आज ऐसे सोचो की हमारी जरूरतकी ना हो पर शान के लिए कर्ज लेकर ये चीजें हम ख़ुशी ख़ुशी बसा लेते है उसकी सचमुच व्यवहारमें अहमियत है ????

ये सब बातोंसे मुझे एक फायदा जबरदस्त हुआ की हमें रात को सोते वक्त नींद की गोली नहीं लेनी पड़ती ...चैन और सुकून की नींद तुरंत आ ही जाती है .....

निष्कर्ष : दूसरोको देखकर नहीं पर अपनी जरूरत देखकर चलते है तो हम कई मुश्किलों से बच सकते है ....

4 टिप्‍पणियां:

  1. आपके लेखन ने इसे जानदार और शानदार बना दिया है....

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  2. ये सब बातोंसे मुझे एक फायदा जबरदस्त हुआ की हमें रात को सोते वक्त नींद की गोली नहीं लेनी पड़ती ...चैन और सुकून की नींद तुरंत आ ही जाती है .....
    यही तो चाहिए। सुकून की नींद।

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