18 जनवरी 2010

रश्क था हमें भी

धुलसी उड़ाती हवाओंसे बचपनसे जवानी चुराकर लाते है ,

आँखों आँखोंमें सपने देखते हुए ये भी कट जाती है ,

खुबसूरत लम्होंको बांधकर दामनसे

यूँ ही एक उम्र कट जाती है .........

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रश्क करते थे दोस्ती पर अपनी ,

तुम्हे दोस्त कहते हुए गुरुर आ जाता था ,

बस रहे गये तनहा हम ये दास्ताँ बयां करने ,

हमारी मौतको तुम खुद पर ले गए ....

3 टिप्‍पणियां:

  1. जिंदगी मेरे लिए ख्वाबों के बादल पर उड़नेवाली परी है .!! जो हर पल को जोड़ते हुए बनती है, और उन हर पलोंमें छुपी एक जिंदगी होती है ....सच और सही.

    खुबसूरत लम्होंको बांधकर दामनसे
    यूँ ही एक उम्र कट जाती है .........

    खट्टी-मीठी लगी - शुभकामनाएं.

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  2. दर्द-ऐ-बयां, दिल को छू गई.

    उत्तर देंहटाएं

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