13 जनवरी 2010

उत्तरायण ....

देखो ये पतंग में इस साल कितने चेहरे नज़र आते है ?

महेंगाई बनी है पतंग हरदम ऊँचे बढे जाती है ....

भ्रष्टाचार बढ़ रहा है ना कट रहा है उसका पतंग ...

गरीबोंको नसीब हुआ है सिर्फ देखकर खुश होना इस उत्तरायणको ,

लूंटे धागेसे पकड़ी पतंगसे दिल बहला पाने की ये जंग .....

कौभांड़ोकी भरमार मची है हर एक पतंग एक से बढ़कर एक है

ये है भारत का राजकारण ....

ये सोच रही हूँ बैठकर किचनमें चलो चिक्की की तस्वीर उतार लो ,

उन्धिया और जिलेबी का वीडियो बना लो

कल जो महेंगाई के मारे ये भी ना बना पाए कभी

तो इन तस्वीरों से मन बहलाएँगे ...

कोई ऐसा मांजा सुतवा कर लाओ

पतंग बनाकर इन भ्रष्ट राजसेवकों की

उसे सब मिलकर काटो ..........

2 टिप्‍पणियां:

  1. पतंग बनाकर इन भ्रष्ट राजसेवकों की

    उसे सब मिलकर काटो .....nice

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  2. हम तो पकवानों, पतंगो की तस्वीर उतार लेगें. मँहगाई में जब दूर्लभ हो जाएंगे, इन्हे देख कर मन बहल जाएगा.
    (जिन्हे कौभांड नहीं पता
    कौभांड़ - घोटाला )

    उत्तर देंहटाएं

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