24 दिसंबर 2009

हमें खुश रहना है ....

हा ...हा ....हा....हा.....

लगता है सुबह सुबह में कोई लाफिंग क्लबमें घुस गए भूल से ...

नहीं नहीं मुझे खुश रहना है ..आज संकल्प करें ...मुझे खुश रहना है ...स्वाइन फ्लू की तरह ये भी तेजी से फैलने वाली बीमारी है ..चलो मोबाइल में एक जोक लिखो एस एम् एस करो ..सिर्फ़ एक ही ...और फ़िर देखो कुछ घंटो में ये कितनोके चेहरे पर हँसी का जुकाम लेकर आ जाएगा ....

हम खुश रहना चाहते है ..पर हम खुश क्यों नहीं रहते ? एक अहम् सवाल ...

हम खुश नहीं रहते क्योंकि हम खुश रहना ही नहीं चाहते ...बहुत बड़ी गड़बड़ दिख्खे है जनाब ...कुछ भी पल्ले नहीं पड़ा आज ..जरा अपनी पत्नी को किचनमें जाकर बोलो ,कोई भी उम्र की हो ," हाई ,मेरी ऐश्वर्या राइ !!!" थोड़ा झेंप जाएगी पर मुस्कुरा देगी ...अपने पतिदेव को कहो ," आज तो बिल्कुल गोविंदासे प्रेरित होकर कपड़े पहने है ????"

वो तिरछी मुस्कान का नजारा !!!! बच्चे को नई कलम का तोहफा ..या फ़िर नई कोमिक उसके टेबल पर रखना !!

अपनी कोलेज जाती लड़कीके लिए लेटेस्ट जींस की पेंट या फ़िर नई तरह की बुँदे भी चलेगी ...देखो !!वो खिली मुस्कान आपको कई गुना उनकी तरफ़से वापस मिलेगी खुशी बनकर ...जाने अनजाने इस खुशी का उधर कोई नहीं रखता ...उसे जल्द से जल्द वापस कर देता है ...कोई खास वजह से तो तोहफा हर कोई देता है पर बिना वजह दी गई एक छोटी सी चीज ये एहसास दिला देती है की तुम या आप मेरे लिए हो बहुत ही खास ...

पर अफ़सोस हमें तो ये सोचने का भी बिल्कुल वक्त नहीं नहीं ...हम बच्चोके टिफिन बॉक्स भरनेसे या पति की रोजमर्रा की जरूरत संभालने से या फ़िर घर और ऑफिस के बीच झूलने से अलावा कुछ नहीं सोच पाते ।

कहते है हमारे अर्ध जाग्रत मन की शक्ति नब्बे प्रतिशत है जो हम इस्तेमाल नहीं करते ....

ये मेरा ख़ुद का आजमाया हुआ प्रयोग है :

किसी दोस्त या रिश्तेदारसे आप कुछ लंबे अरसे से नहीं मिल पाए हो ...कुछ फोन या ख़बर नहीं ..बस उसे याद करो बड़ी शिद्दतसे ...जब वक्त मिले उसकी सूरत अपनी आँखों के सामने ला दो ...बहुत ही जल्द अचानक ही कुछ ऐसे संजोग बन जायेंगे और आप उसी व्यक्ति को मिल पाओगे या उसकी जरूर कोई न कोई ख़बर मिल जायेगी ...आपको जो लक्ष्य पाना है उसकी मन में छबि बना लो ...और उसे बार बार देखो ...वो लक्ष्य हासिल होना ही होना है ...पर इसकी एक ही शर्त भी होती है की आप किसीके बारेमें बुरा नहीं सोचोगे ...और ये कभी भी पुरा नहीं होगा ...अपने ख़ुद के काम के बारे में शंका करोगे तो जो नकारात्मक होगा वही परिणाम आएगा ...यानि कोई भी नकारात्मक विचार नहीं ...क्योंकि अर्ध जाग्रत मन इस बारे में कोई विश्लेषण नहीं कर सकता वो तो सिर्फ़ आका का हुक्म मानता है ॥

इसका मतलब ये कतई नहीं की आपकी तनख्वाह दस हजार रूपये हो और आप ख्वाब मर्सिडीज़ के देखे ...

दूसरा किसी और को देखकर जलन न रखे ...बल्कि उसकी खुशी में शामिल हो तहे दिल से बधाई दे ...मुश्किल है नामुमकिन नहीं ... बस आजू बाजू में देखकर मन मसोसना बंद करो और अपनी भीतर में झांक कर खुशी देखो ...

कोई कोई साल ऐसे आते है की उस वक्त हमारे साथ सब कुछ हमारे हित के विरुध्ध ही होता है ...लगता है सब ख़त्म हो जाएगा ...धंधे में घाटा ,घर में बीमारी , संतानका परीक्षा में विफल होना ....सब कुछ एक साथ ...नसीब को कोसते है उस वक्त ....लेकिन एक बात की और आज के बाद जरूर गौर करें की ये सब होने के बावजूद आप जिन्दा है और ये सब कुछ सहन करके भी आज खड़े है ...आपकी झेलने की शक्तिका अंदाज़ आएगा तो एक बार अपनी और आपका मान बढेगा ...आत्मविश्वास आएगा और फ़िर दुनियाकी कोई खुशी आपसे कैसे दूर रह पाएगी ????

बस अंत में इतना ही कहना है ...अपने निजी दोस्तों की सूचि में सबसे पहला नाम अपना लिखो .....

1 टिप्पणी:

  1. अपने निजी दोस्तों की सूचि में सबसे पहला नाम अपना लिखो .....

    -सही सलाह!

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