
मौनकी परिभाषा शब्दमें कैसे ?
भावोंका अक्षरदेह क्यों ?
अहेसासकी सीमा कहाँ से कहाँ तक ?
प्रेमका आगाज़ कब अंजाम कहाँ ?
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पानीकी बूंदोंके साथ बहने दो आज
देह कागज़का तो क्या हुआ ?
यूँ चुपचाप बहते रहने का मौसम कहाँ ?
दो हमजोली साथ है बस हमें इस पल जीने दो .
शब्दो की वयाँ कहाँ तक
प्रत्युत्तर देंहटाएंप्रेम की अनुभुति कहाँ तक
बस इस पल को जी लो....
बेहतरीन .....
रचना जीवन की अभिव्यक्ति है।
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