11 नवंबर 2009

शोर ....

भाषा पर लड़ लेने वालों

आज मुझे तुम पर लाज आती है ,

शूक्रिया अय उपरवाले

तुने मुझे गूंगा बनाया है ....

============================

बोल बोल कर तुम क्यों इतना शोर मचाते हो ?

शब्दों की अहमियत को यूँ जाया करे जाते हो ....

कुछ पल चुप कर देख भी लो , तुम जो सुनाना चाहते हो ,

खामोशी की सदायें ख़ुद ही ये बता देती है .....

3 टिप्‍पणियां:

  1. शूक्रिया अय उपरवाले

    तुने मुझे गूंगा बनाया है ....

    जीवन की अभिव्यक्ति का सच।

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...