4 नवंबर 2009

जिंदगी गले लगा ले ...

जिंदगी !!!सलाम नमस्ते !!!!

हमारे शहरमें विविध भारतीको मिलकर पाँच ऍफ़ एम् रेडियो है ...आज कल इसकी बोल बाला कुछ ज्यादा ही है ...और संगीत मेरे शौक से ज्यादा मेरी कमजोरी है ...आज का युवा कान में इअर फोन लगाकर गानोंमें डूबा नजर आना ये शहरी जीवन का एक पहलु है ...

ये रेडियो के रेडियो जोकीका एक नया क्रिएटिव करिअर है ...चपर चपर बातें युवा वर्ग को इस करिअर के लिए आकर्षित कर रही है ....एक अच्छी आवाज निहायत जरूरी तो है ही पर वर्तमान पर पैनी नजर रखते हुए सवालों और मुद्दों पर चर्चा भी काफी दिलचस्प होती है ....मुझे भी शौक है ऐसी चर्चामें कभी कभी हिस्सा लेने का ....

हमारे यहाँ ऐसे ही एक ऍफ़ एम् रेडियो सिटीने एक सचमुच मानवीय इंसानियत से भरी मुहीम शुरू की है ...हर १४ नवम्बर पंडित जवाहरलाल नेहरू के जनम दिवस को सही मायने में बाल दिवस के रूप में मनाने की ....

नवम्बर के शुरू होते है "जिंदगी मुबारक " नामक जलसा शुरू होता है ...इंसानियत का जिन्दा मिसाल सा रूप ...रेडियो पर से एक अपील की जाती है की जो बच्चे अनाथ है जिनका इस दुनिया में कोई नहीं , जो जिंदगीमें रोटी ,कपड़ा ,मकान जैसी प्राथमिक सुविधा से वंचित तो है ही पर उन्हें लोगोकी झूठन ,उतरनसे जिंदगी बसर करनी पड़ती है ...शिक्षा तो उनके लिए महज एक सपना है ...ऐसे अनाथ बच्चो के लिए एक नया तोहफा माँगा जाता है ....एक चोकलेट से लेकर एक पेन्सिल से लेकर कुछ भी पर नया हो ...जो उन बच्चोके चेहरे पर मुस्कराहट ला सके ....लोग ब्रांडेड खिलौने ,कपड़े ,साइकिल जैसे कई बच्चो की उपयोगी वस्तुओंसे उनके मेजिक बॉक्स भर देते है ...अनाज ,कैश ,चेक वगैरह तो अलग ....फ़िर इन्हे एक अनाथ बालकों के संस्था में जा कर बांटा जाता है ...उनके चेहरों पर मुस्कानका तोहफा दिया जाता है ....२ नवम्बर से ये अभियान फ़िर शुरू किया गया है ....

कौन कहता है ...रेडियो सशक्त माध्यम नहीं है !!!!! ये छोटी उम्र के रेडियो जोकी हमारी इंसानियत को जक जोर कर रख देते है .....और लोग भी अच्छा रिस्पोंस देते है ......

कभी आप छोटे से बच्चे को बूट पोलिश करते देख लो , चाय की कितली पर कप धोते हुए देखो तो उन्हें एक चोकलेट या बिस्किट देकर उनका चेहरा देख लेना ...लाखो रूपये के दान से ज्यादा संतुष्टि ख़ुद आपको मिलेगी । मैंने ख़ुद अपनी नजर से देखा एक किस्सा बता रही हूँ :

एक छोटी से बच्ची तीन चार साल की । स्कुल ड्रेस में उसके दादा दादी ,मामा पापा के साथ ऐसी एक संस्था में लायी गई ...और उसके द्वारा उस स्कुल में उसके बर्थडे को मनाया गया ...वहां के बच्चोने हैप्पी बर्थडे टू यु गाया और उस नन्ही सी बच्ची ने केक काटी ...ऐसे कई किस्से हम देख चुके है ...बस कभी एक बार अपना के देख लो ...भगवान ऊपर नहीं हमारे अन्दर बसता है बस टटोल कर जगा दो ...

मेरा सलाम ये जिंदगी मुबारक को और ये छोटी उम्र में आकाश से ऊँची सोच रखने वाले ये युवा पीढी के बाशिंदों को ....

1 टिप्पणी:

  1. बड़े ही मार्मिक प्रसंग से आपने बात रखी है। ऐसे नेक काम में हमें आगे आना ही चाहिए।

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...