29 अक्तूबर 2009

करवट ......

नर्म लगती रही हर बिसात इश्कमें ,

जब कुछ ख्वाबोंको बुलाने हम सो गए ,

हादसा बन गई वो तमाम यादें तुम्हारी ,

जो नर्म नाजुक अंडोसी टूटती रही ......

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टुटा दिल हमारा भी और तुम्हारे ख़याल ,

डसते रहे एक नागदंशकी चुभन से अब हर पल ......

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कहा था सयानोंने इश्क करना खेल है आगका ,

पर क्या जाने वो दीवानेकी ये आग ठण्ड का अहेसास लिए थी .....

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फूलोंकी सेज पर सोना तो चाह रहा हर कोई ,

तेरे इश्कमें तेरी बेवफाईने हमें काँटोंसी चुभन तो दी ,

न कोई शिकवा किया ना कोई गिला ,

तस्वीर तुम्हारी मेरे जहनमें हरदम हसती ही रही .....

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हर सोफे पर बैठकर हमें जो अहेसास हुआ वो लिख दिया ......

2 टिप्‍पणियां:

  1. नर्म लगती रही हर बिसात इश्कमें
    तस्वीर तुम्हारी मेरे जहनमें हरदम हसती ही रही
    sundar rachna

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  2. कहा था सयानोंने इश्क करना खेल है आगका ,. क्या कोई शक है.

    उत्तर देंहटाएं

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