17 सितंबर 2009

बस एक खामोशी ....

कलम तोड़ दूँ ,कागज़ फाड़ दूँ ऐसा गुस्सा आता है कभी ,

अल्फाजों को भी लुकाछिपी खेलने का शौक जगता है ,

बस चुपचाप आसमां को ताक लें बिना कुछ कहें ऐसा दिल करे ,

समज लो एक नए एहसास को जनम लेने की घड़ी करीब है .........

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नवरात्री के उपलक्ष्यमें दो खास पोस्ट आने वाले दिन में .....

इंतज़ार करें ....

2 टिप्‍पणियां:

  1. आपने ये भी खाश ही लिखा है आने वाले पोस्ट का इन्त्ज़ार रहेगा

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  2. बस चुपचाप आसमां को ताक लें बिना कुछ कहें ऐसा दिल करे ,

    समज लो एक नए एहसास को जनम लेने की घड़ी करीब है
    hmm gusse mein chipi nazakat bhi hai,bahut khub.

    उत्तर देंहटाएं

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