10 अगस्त 2009

सड़क

कभी कभी मेरे दिलमें ख़याल आता है ,

ये सड़क जिंदगीसे भी लम्बी होती होगी कभी ....

हम आधी सड़क पर जुड़ते है एक हुजूम के साथ ,

चलते है उसकी राहों पर यूँही कुछ सपने संजो कर ,

रुकते ,थकते ,सुस्ताकर चलता तो रहना है हमें ,

टेढी राहों पर संग संग किसीके हमसफ़र बनकर .....

ये साँसों की डोर छोड़ती है जब साथ ,

सफर रुकता है हमारा वहीं पर उसी पल ,

पर ये तो सड़क है ,अभी थमी नहीं ,रुकी नहीं ,

बस उसे तो चलते रहना है उम्र से भी आगे ही आगे ......

4 टिप्‍पणियां:

  1. हर सफ़र इतना कठिन
    हर मोड़ इतना मुड़ा...

    सच कहा आपने ज़िंदगी सड़क से भी लंबी हो गई है..

    जवाब देंहटाएं
  2. पर ये तो सड़क है ,अभी थमी नहीं ,रुकी नहीं ,

    बस उसे तो चलते रहना है उम्र से भी आगे ही आगे ......
    sahi baat ye sadak ye safar chalta rehta hai,chahe kuchpiche chut jaye,sunder rachana.badhai

    जवाब देंहटाएं
  3. wahh kya khoob likha hai.....waise dost raste chalne wale banate hai ....!! main hamesha yahi sochta hu...or yahi manta bhi hu...

    Jai Ho Mangalmay ho

    जवाब देंहटाएं

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