22 जुलाई 2009

वक्त




वक्त को बहता पानी कहें ? या हथेलीसे फिसलती रेत?

काश यूँ ही नींद एक बार फिर आ जाये

और हमें कोई प्यार से फिर सहलाता रहें ....

रेत घडीकी रेत एक बार फिसलना भूल जाए ........


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ख्वाबोंसे ताबीर तक का सफर बड़ी टेढी गलियों से गुजरता होगा ,

बस हम तो चलते ही गए बहते पानीकी तरह वक्त के साथ ,

खुबसूरत सी राहोंसे रेत की तरह फिसलते हुए वक्त की हथेली से ,

जब मंजिलके सामने आकर रुके तो लगा ये राहे कुछ और लम्बी होती .....

2 टिप्‍पणियां:

  1. वक़्त के साथ बहते हुवे ........... वक़्त के सपनों में खोये............ सुन्दर रचना

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  2. काश यूँ ही नींद एक बार फिर आ जाये

    और हमें कोई प्यार से फिर सहलाता रहें ....

    रेत घडीकी रेत एक बार फिसलना भूल जाए ........


    bahut sunder

    उत्तर देंहटाएं

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