11 अप्रैल 2009

ममताकी छाँवमें ...!!!


चंदन शान्तिसे बैठा हुआ था ।वह अपने आजुबाजु के नए माहौल को गौरसे देख रहा था .आज उसके घर में काफी चहलपहल थी .दादीने उसे पास बुलाकर नए कपड़े पहनाये. चंदन बहुत खुश हो गया .सभी तैयार हो रहे थे .एक बड़ी सी सजिधजी गाड़ी में बैठकर उन्हें कहीं जाना था .आज तो चंदन अपने पिताजी को गौर से देख रहा था .सबने उन्हें खूब सजधज कर तैयार किया था . पर पिताजी बहुत खुश नहीं दिखाई दे रहे थे !

चंदन एक पांच साल का बच्चा था । तकरीबन दो साल पहले उसकी माँ पीलिया की बीमारी के कारण इस दुनिया को छोड़ चुकी थी . उसी साल चंदन को बहुत तेज बुखार आया . उसकी कुछ दवाओं की साइड इफेक्ट के कारण चंदनके गलेमें कुछ खराबी आ गई और वह बोलने के लिए असमर्थ हो गया . उसकी मासूम निगाहें हरदम उसकी माँ को ही ढूँढती रहती थी .कई बार चंदन माँ की माला लगी हुई तस्वीर के सामने खड़े रहकर उसे एक टक निहारता रहता था .उसकी इस उदासी घरमें किसीसे छिपी हुई नहीं थी

"चलो बेटा चंदन !! आओ हमारे पास गाड़ी में बैठ जाओ ." दादाजी ने पुकारा ।चंदन जल्दी से उनकी गोद में जाकर बैठ गया .दादी ने भी प्यार से उसे पुचकारा .वे सब सेठ विनोद रायके घर जा पहुंचे . उनकी इकलौती बेटी बरखाके साथ चंदन के पिताजी सुजीत का ब्याह हो रहा था .कुछ गिने चुने लोगों के साथ रस्म संपन्न हो रही थी . विधि सादगीपूर्ण ढंग से समाप्त हो गई . प्रीति-भोज के बाद सब घर वापस लौट आए ॥

दूसरे दिन चंदन के दादा सुबोधचंदने इस उपलक्ष्य में एक बड़ी पूजा का आयोजन किया था ।सभी रिश्तेदारों को बुलाया गया . चंदन को फ़िर नए कपडे पहनाये गए .कल से चंदन की आँखे विस्मय से भरी थी .एक सजी संवरी औरत को लेकर सब घर आए थे . बड़ी सुंदर थी वह . उसके पिताजी उस औरत के साथ बात करते थे . पर वो औरत बड़ी शरमा रही थी .चंदन को उसके पिताजी ने अपने पास बुलाया .उसे अपनी गोद में बिठाया ....

फ़िर बताया कि,"चंदन बेटे ,इनसे मिलो !! ये तुम्हारी माँ !!"मासूम आँखे उनपर ठहरा कर वो विस्मित होकर देखता रहा ....

"नहीं ये मेरी माँ नहीं हो सकती !!! तस्वीरमें तो किसी और की फोटो लगी हुई है .!!" चंदन यही सोचता हुआ वहां से चला गया .सब मुझे कहते थे मेरी माँ तो भगवानके घर चली गई है .वो कैसे वापस आ सकती है ? चंदन फ़िर गहरी सोचमें डूब गया ।चंदनके मासूम मनमें चल रही इस उथल पुथल की बरखा ने एक ही नजरमें परख लिया . उस वक्त तो वह कुछ भी नहीं बोली .रात को जब सब महमान लौट चुके थे तब सुजीत की माँ बरखा को लेकर सुजीत के कमरे में ले गई ...

हर रोज की तरह चंदन पहले से ही उधर जा कर सो चुका था । थका होने के कारण वह गहरी नींद में था .सुजीत की माँ उसे गोदी में उठाकर बाहर जाने लगी ...

उस वक्त बरखा ने उन्हें जाते हुए रोक लिया ."मैं इधर सिर्फ़ आपके बेटे की पत्नी नहीं इस मासूम की माँ भी बनकर आई हूँ .चंदन हमारे साथ ही रहेगा ." बड़े प्यार भरे स्वर से चंदन को अपनी गोद में उठाते हुए वह बोली । संतोष की एक दीर्घ साँस लेकर सुजीत की माँ वापस चली गई ....

नींद में चंदन उससे लिपटते हुए धीरी आवाज से बोल उठा ,"माँ !!!!"

सुजीत और बरखा की आँखों में खुशी की आंसू छलक आए .आयाम और बरखा की तीन साल पहले शादी हुई थी .शादी के ठीक एक साल बाद दोनों कारमें नैनीताल जा रहे थे . वहां पर ड्राईवर की गलती के कारण एक दुर्घटना हो गई जिसमे बरखा ने आयाम और अपने आनेवाले बच्चे दोनों को खो दिया था . डॉक्टर ने बड़ी मुश्किल से बरखा की जान बचा ली पर उस दुर्घटना के कारण बरखा अपनी मातृत्व धारण करने की क्षमता को हमेशा के लिए खो चुकी थी . आज चंदन को गोद में लेते वक्त उसे जैसे ये अहसास हुआ की अपना खोया हुआ बच्चा फ़िर खुशी बनकर उसके पास लौट चुका है .....!!!!!!

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