30 मार्च 2009

कभी अनकही एक कहानी सी ....

हर वक्त मौजूद रही तस्वीर तुम्हारी नजर के सामने रही ,
तुम जो कह ना पाए वो प्यारकी हर बात हमें समज में आई .....

आज हवाओमें घुला मौसम प्यार का है ,
फ़िर क्यों मेरे आशियानेमें आलम तन्हाई का है ???

मिलेंगे आपसे तो कहेंगे क्या शब्दोको एक एक करके दिलमें संजों रहे है ...
फ़िर भी यकीं है हमें कल जब मिलेंगे तब लब्ज़ होठोंमें कैद ही रहेंगे ......

तुम्हारी वफाकी शिद्दत हमें आज समज में आ गई ,
तुम्हारे आने के इंतजारमें जब हमारी आँखें भर आई .....

1 टिप्पणी:

  1. तुम्हारी वफाकी शिद्दत हमें आज समज में आ गई ,
    तुम्हारे आने के इंतजारमें जब हमारी आँखें भर आई
    bahut sunder,bhawanao ka samandar ho jaise,waah

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