15 मार्च 2009

चलो एक बार फ़िर से .....

प्यासका आखरी मकाम एक पयमाना था ,

बूंदोंका ठहरना वहां एक आस का ठिकाना था ....

ये किस्मतकी बात थी की लब तक आते जाम छुट गया ,

गला प्यासा ही रहा और आंखोसे दरिया छलक गया ....

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चलो फिर इश्कको आजमाया जाय ,

कांचकी इस दीवारके उस पार अपने दिलकी धड़कन को सुनाया जाय ,

दीदार करने भरसे ये दिल कभी भरता ही नहीं है ,

आज उनकी ये तस्वीरको उसमे कैद करके एक अफसाना बनाया जाय ......

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