20 फ़रवरी 2009

खामोशीका गीत .........

तुम मिले तो क्या मिले ,चलते रहे कुछ सिलसिले ,
हवाओंमें,फिजाओमें ,रंगत घुल गई ,प्यार परवान चढ़ गया ...

साँसोंमें ,खयालोमें ,पलकोंमें तुमने आशियाना एक बनाया ,
मेरी जिंदगानी के बंद दरवाजे पर चुपकेसे दस्तक दे दिया ....

बंद दरवाजेके दूसरी और तुम्हारी साँसे सुनाई देती थी ,
हवाओमें हम दोनोकी खामोशी जैसे प्यार का गीत गाती थी .....

शब्दोको सहलाने,मैंने साँसों का संगीत सुनने बंद दरवाजा खोल दिया ,
तुम्हे देखने से कबसे तरस रही थी आँखें ,दीदार करते बंद हो गई ....

बंद होते पलके ,अहसासने कुछ घुटन महसूस हुई तो लबोंको खोल दिया ,
रुक जाओ मेरी जिंदगी में जिंदगीभर के लिए ये हौले से बोल दिया .......

6 टिप्‍पणियां:

  1. शब्दोको सहलाने,मैंने साँसों का संगीत सुनने बंद दरवाजा खोल दिया ,
    तुम्हे देखने से कबसे तरस रही थी आँखें ,दीदार करते बंद हो गई ....

    bahut badhiya

    जवाब देंहटाएं
  2. शब्दोको सहलाने,मैंने साँसों का संगीत सुनने बंद दरवाजा खोल दिया ,
    तुम्हे देखने से कबसे तरस रही थी आँखें ,दीदार करते बंद हो गई
    सुंदर अभिव्यक्ति . बधाई.

    जवाब देंहटाएं
  3. सुंदर भावपूर्ण अभिव्यक्ति पर हार्दिक बधाई.

    चन्द्र मोहन गुप्त

    जवाब देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...