28 दिसंबर 2008

खुशबू ....!!!




खुशबू तुम दिखती तो नहीं हो ...

पर तुम्हे महसूस करती हूँ हर पल ...!!

फूल तुम्हे मैं कैसे भूलूं ?

डाली पर उगते हो जब तुम ,

काँटों कि चुभन को सहते हुए भी ,

आँखों को यूं मूंदकर .......

वो खुशबू को जहनमें भर लेते है हम ,

क्योंकि तुम पौधे पर ही खूबसूरत हो लगते ....


पहली बरसातमें तपती धरती पर ,

पड़ती है बारिशकी पहली बूंदें ...

धरती से उठती वो सौंधी सी खुशबू ,

होती है पहले प्यार के अहसास सी .....


खुशबू ....रिश्तों में बंधे प्यारकी,

खुशबू ...वो मुस्कानों की,

खुशबू ...दोस्ती के अटूट बन्धनकी ,

खुशबू .......महकते विचारों की .......!!!!


खुशबू तुम तो हो मेरी जिंदगी में बस रजनीगंधा के फूलों सी ........

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