5 दिसंबर 2008

भ्रमण ....

भ्रमण .... ।
आज इस ब्लॉग में मैं लोगों के बारे में बताती हूँ जिन्हें मैंने अपने साथ भ्रमण में देखा है ।हम जब कहीं भी घूमनेके उद्देश्य से जाते है तो उस वक्त हमारा लक्ष्य क्या होता है ?-नई जगह को देखना ॥-घरसे दूर महज एक परिवर्तन के लिए ...-अपनी जिज्ञासा को संतुष्ट करने के लिए ...-अभ्यास के उपलक्ष्य में ...शायद ज्यादातर लोग नई जगह देखने के लिए ही जाते है ।थोड़े दिन रोजमर्रा की जिन्दगी से बेतकल्लुफ होकर घूमने के आनंद ही कुछ और है .मैं प्रवास के साथ उन प्रवासियों का भी अक्सर निरीक्षण करती हूँ जो साथ ही घूम रहे होते है . हम लोग ज्यादातर शहरों के नाम मालूम कर लेते है और वहां के मुख्य दर्शनीय स्थल के बारे में पता करते है . बस आगे कुछ नहीं .उसके बाद जाने का माध्यम. रेल या रोड या विमान ...कम लागत और ज्यादा स्थल का हमारा economical उद्देश्य भी रहेगा . पैकेज टूर का प्रेफेरंस ज्यादा पसंद आता है .अब बारी है जानकारी की . जिस जगह पर हम आम लोग घूमने जाते है वहां का सम्पूर्ण इतिहास बहुत ही कम लोग जानते है . जो विद्यार्थी अभ्यास हेतु आते है उन्हें छोड़कर लगभग सभी लोग इस बात के लिए सिर्फ़ गाईड पर ही निर्भर करते है . उसका बोलना भी उस जगह छोड़ते वक्त तक शायद याद रहता होगा . चलो अगली मंजिल पर ...जल्दी मची रहती है ...चलो अब कुछ खा लेते है ...ये दूसरा लक्ष्य .गाइड के पीछे बस भागते चले जाओ . अरे कुछ लोग तो अगर थके होते है तो अन्दर आने का कष्ट भी नहीं करते ,बस बाहर ही बैठ जाते है .वहां पर लिखा हुआ जगह का इतिहास पढ़ने का समय भला किसे है ?हाँ कई लोग अपना भी नाम वहां खोदकर या चोक से लिखकर अमर जरूर कर देते है ...वहां पर निजी कैमरे से खींची हुई तस्वीरों को देखो तो दर्शनीय स्थल की झलक मात्र मिलती है और व्यक्तियों की तस्वीर बड़ी नजर आती है जो उस बात का सबूत मात्र बन जाती है की हम इस जगह पर गए थे .एक जगह से दूसरी जगह पर जाते वक्त ट्रेन या वाहन में ज्यादातर लोग सोते हुए पाओगे .रस्ते पर आने वाले छोटे छोटे गाँव ,बस्तियां ,खेत खलिहान की सुन्दरता और उसके द्वारा हमारे भारत का सही मायने में दर्शन करने का मौका चुक जाते है .अब मैं बताती हूँ विदेशी प्रवासियों के बारे में :वे लोग यहाँ पर आने से पहले पुस्तकों के जरिये या इंटरनेट पर हर जगह की पुरी जानकारी प्राप्त कर लेते है .वे जगहों के दर्शनीय स्थल के अलावा वहां का रहन सहन ,खाना पीना , त्यौहारों के बारेमें हर सम्भव माहिती लेकर आते है .हर जगह पर वह बड़ी बारीकी से अवलोकन करते हुए नजर आते है . लिखी हुई जानकारी को रूचि पूर्वक पढ़ते है .गाइड से तरह तरह के सवाल भी पुछते है. साफ सफ़ाई और सभी नीति नियमोंका सर्वथा पालन करते है .इस तरह हर जगह को पूर्णतया रुचिपूर्वक देखने का हममे अभाव पाया गया है .आपने मेरे भ्रमण के लेखों में ये भी देखा होगा कि हमने हर जगह को पुरा समय लेकर देखा है .ऋषिकेश -मसूरी -हरिद्वार के तीन स्थलों में हमने पूरे पन्द्रह दिन (जाने आने के दो दिन सहित ) गुजारे थे.उस जगह के अहसास को ख़ुद में समेटा था .हर प्रदेश की भिन्नता को समज पाने की कोशिश की थी .जाते और आते वक्त रस्तेमें आते गाँव को भी बड़े गौर से देखते थे .उत्तर के राज्यों से पूर्व की तरफ़ जाते वक्त बिहार में हमने हर जगह तालाब और उसमे खिले सफ़ेद एवं गुलाबी कमल के फूलों का दिलकश नजारा भी देखा . ट्रेन में सुबह के वक्त घन कोहरा भी महसूस किया जो की हमने गुजरात में कभी भी नहीं देखा था . सिर्फ़ दस फीट की दूरी पर भी कुछ नजर नहीं आता था . पता नहीं ड्राईवर ट्रेन कैसे चलाते होंगे ?अब ज्यादातर लोग घुमते वक्त मिनरल वाटर का ही प्रयोग करते है .लेकिन मैंने स्वानुभव से एक बात महसूस की है कि हर जगह के खाने की तासीर तो अलग होती है पर उस खाने को ठीक से हजम कर पाने की ताकत वहां के पानी में हुआ करती है .आम दिनों में मैं जबरदस्ती से दो गुलाबजामुन खा सकती हूँ ,पर एक बार जब मैं जोधपुर गई थी तब पांच या छ: आराम से खा सकती थी और हजम भी कर सकती थी . हम जब कहीं भी जाएं तो वहां के विशिष्ट पकवानों की जानकारी भी ले , उसे चखें ,भारत की इस वैविध्यता का भी अनुभव करें .चाहे वो राजस्थान की गट्टेकी सब्जी हो या दालbaati हो , दिल्ही की चाट और गोल gappe ,गुजरात के खमन ढोकला हो . मजा जरूर लें . हर जगह को सिर्फ़ फोटो में नहीं अपने दिल में भी बसा लें .इत्मिनान से हर जगह देखे . हो सके तो होम वर्क करके जाओ , बड़ा मजा आएगा . जानती हूँ की आजकी दौड़ती भागती जिन्दगी में समय का अभाव है .लेकिन थोड़े दिन में ज्यादा देखने की लालच की जगह थोड़ा पर सम्पूर्ण स्थल देखने की कोशिश करो .पैसों के पीछे हरदम भागने वाले इंसान पैसों के सही इस्तेमाल करने का थोड़ा वक्त भी निकाल लो,चुरा लो .....कभी बैलगाडी या ऊंट गाड़ी में बैठकर गाँव के लहलहाते खेतों के बीच में से गुजरने का आनंद लो ,वहां के कुओं का मीठा पानी पीओ ,भैस या गाय के ताजे दूध को पीकर देखो . ये सब हवाई जहाज में उड़ने वालों या फाइव स्टार होटल में ठहरने वालों की किस्मतमें नहीं होता .



इश्वर की बनायी हुई इस दुनिया को इस तरह देखने की एक बार जरूर कोशिश करें ...गम और दर्द दुःख को भुला देने का इससे बेहतर रास्ता शायद ही कोई हो .......

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