24 जुलाई 2016

शायद..

शायद आज नई बात हो
 शायद आज फिर उनसे मुलाकात हो
शायद उन्हें भी याद आए मेरी वह बातें
शायद बे खयाली में उनके लबों पर मुस्कुराहट हो शायद आज वह बात हो
शायद मुद्दतों के बाद यह फुर्सत के लम्हे मैंने पाए हैं शायद उन्हें जीने की ख्वाहिशों वाले उम्मीदें हो शायद वह आए फिर भी मैं चुप रह जाऊ
शायद आज उनकी तरफ से कोई बात हो
शायद जिसकी बदौलत जिंदा रह पाए हैं हम
शायद वह मिले या ना मिले
 और
 मेरे हाथों में मेरे सपनों के टूटे हुए शीशे के टुकड़ों में चाहत के अफसाने हो.....

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