18 नवंबर 2015

औरत : तेरी कहानी (9)

घर लौटे तो लड़के ने ही बोला की मैंने इसे एक सप्ताह का समय दिया है सोचने के लिए  . और उसके बाद ही जवाब देना  . माँ के चहेरे पर चिंता की लकीरें थी  . लड़का मुझसे काफी बड़ा था  . और एक पत्नी बनने के बाद घर की जिम्मेदारीके साथ कॅरियर में ऊंचाई को छूना मुश्किल तो बन ही जाता है  . मुझे दीदी के कर्म की सजा मिलनी थी  . और लड़की के जन्म की सजा भी भुगतनी थी ये शादी करने के बाद  . मैं जानती थी की शुरुआत में तो सब अच्छे से ही पेश आते है पर मेरे शौक के कारण  घर पर देरी से लौटना  , पुरुषों के साथ व्यावसायिक संपर्क में रहना एक पुरुष के इगो को बहुत समय तक रास नहीं आ सकता  . फिर खानदान की इज्जत को बीच में लाया जाता है  ,और संतान को जन्म तो औरत के जन्म को पूर्ण करने के लिए देना ही पड़ता है  .
सोच विचार में आज छः दिन तो चले गए  . कल जवाब देना था और पापा तो हाँ ही बोलने वाले थे  .
शाम को कॉलेज से लौटते वक्त मेरा एक्सिडंट हो गया  एक ट्रक से टकराई  . मेरे दांये पैर में चोट आई और मुझे हॉस्पिटल में दाखिल कराना  पड़ा  . मैंने भगवान का शुक्रिया किया की बात टली  . पापा ने उस लड़के को फोन करके हकीकत बताई  . एक सप्ताह के बाद जब मैं लौटी तो मुझे पूर्ण तरीके से ठीक होने के लिए लकड़ी के सहारे एक साल तक चलने की हिदायत दी गयी थी  . मैं बेहद खुश हुई  . इस के अलावा दूसरी कोई प्रॉब्लम नहीं थी  . मेरी माँ ने इस दौरान पापा को समजाया  की आपके इस फैसले के कारण  मेरी ऐसी हालत हो गयी  . पापा का रुख थोड़ा नर्म हुआ  . दादी ने तो उस लड़के के कदम को ही गलत ठहराया  … बदशगुनी करार दिया  .
एक हफ्ते बाद वो रियालिटी शो की शुरुआत होनी थी  .
रात मैंने पापा से कहा : पापा , मैंने संगीत की इतनी आराधना की है  और वो शो एक हफ्ते में शुरू होना है  . एक साल तक तो शादी होने से रही  . तो फिर मुझे जाने दो न !!! वहां तो स्पर्धकों का पूरा ख्याल रखा जाता है  . अच्छे होटल्स में ठहराया जाता है  . मुझे जाने की इजाजत दोगे  तो मैं ताउम्र आपकी शुक्रगुजार रहूंगी  .
पापा कुछ नहीं बोले  . उठकर अपने कमरे में चले गए  .




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