3 जून 2012

जिन्दगीका एक टुकड़ा....

मुझे जिन्दगीका एक टुकड़ा मिल गया ,
एक बेगानेसे शहरमे कोई अपना मिल गया ,
जिसकी गलीसे गुजर जाते थे अनजान बनकर कभी ,
वो बेगाना ही एक बेगाने शहरमें अपना बन गया .....
ये लतीफे सुनाती है जिंदगी ,
रोना चाहते है तब हंसाती है जिंदगी ,
जब खिलखिलाहट होठोकी देहलीज पर होती है ,
तो बरबस आंसू रुलाती है जिंदगी ......
इस खेलके मायने होते है जो हमने नहीं चाहे उस पल ,
इस लिए जिंदगीके साथ कदम मिलानेकी कोशिशमें 
लडखडाती है जिंदगी .......
हवाओके रुख कभी हमारी ख्वाहिशोंके मोहताज कहाँ ,
इसी लिए अपनी ऊँगली पर नचाती है जिंदगी .......

2 टिप्‍पणियां:

  1. कुछ पल ही सही जिंदगी मिल जाए तो जीवन सफल हो जाता है ...

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  2. हवाओके रुख कभी हमारी ख्वाहिशोंके मोहताज कहाँ ,
    इसी लिए अपनी ऊँगली पर नचाती है जिंदगी ......उम्मीद की बेहतरीन अभिवयक्ति.....
    .

    उत्तर देंहटाएं

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