3 जनवरी 2012

क्या ये प्यार है ?????

तुम्हारी हर बात याद है ,
फिर भी तुम्हे एहसास कराना
ये मेरी शरारत है कि
कि ...कि ...
मुझे कुछ याद ही नहीं ...
फिर तुम मुझे सब याद दिलाते हो ....
तुम्हारा ये याद दिलाना अच्छा लगता है .....
क्योंकि एक चाहत है ,
तुम बस कहते रहो ...
और मैं यूँही सुनती रहूँ ...
चुपचाप ...
बिलकुल तुम्हारी नज़रोंको देखते हुए ,
जहाँ शामका ढलता सूरज
तुम्हारी आँखोंका रंग सुनहरा कर रहा है ......
यूँही चुपचाप बैठे रहना मेरी आदत है ,
फिर भी मेरी हर बात आँखों की जुबानी सुनकर
तुम हर जवाब देते जाते हो .....
क्या ये प्यार है ?????

1 टिप्पणी:

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...