23 दिसंबर 2011

एक वीरानसा अरमानोंका कब्रस्तान !!!!!

वो शुरू होती है एक जिंदगी बनकर ,
एक जिंदगीके साथ ...
हर सांसकी बाहोंको थामकर चलती है ,
जिंदगी बनकर साथ ...
गिरती है -संभलती है ,
रोती है -हंसती है ,
जागती है -सोती है ,
गुनगुनाती है - चुपसी रहती है ,
खामोश है -बोलती है ,
उडानकी आसमें तकती आसमांको ,
आसमांसे जमीं को तरसती है ,
उसके ख्वाब पलते है पलकों पर ,
वो ख्वाबोंकी ताबीरको तरसती है ,
गिर जाता है कोई ख्वाब सुनहरा पलकसे ,
तो ख्वाबोंकी किरचोंके साथ टूटकर बिखरती है,
उसके हर ख्वाबका ख्वाबगाह एक दिल होता है ,
उस दिलके गुम जानेसे उसके ख्वाब गुम जाते है ......
आज ये इश्तिहार है ये :
मेरे ख्वाब गुम गए है ,
गर मिल जाए उसकी किरचें कभी ,
उसे मुझ तक पहुंचा देना .....
पता है :
एक वीरानसा अरमानोंका कब्रस्तान !!!!!

1 टिप्पणी:

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...