12 दिसंबर 2011

खुदसे दूर खुद से खफा होकर ...

खुदसे दूर खुद से खफा होकर 
बहुत दूर जा चुके है हम अब इस दुनियासे ,
ये होता है खुदके साथ जब सोच वक्तसे आगे चली जाती है ,
और जो कहा हमने वो एक अरसेके बाद कोई समजता है .....
बहुत देर कर देते है जब किसीको समजनेमें 
हो सकता है जब आता है समज 
नाम मेरा  कहीं दूर आसमानोंमें खो चूका होता है ......
एक वो चमकते सितारेको देखकर याद आती है 
वो सारी बातें जो मैंने कही थी कभी 
मतलब इतना सरल और सहज होगा ये उसे पता न था ,
शायद अब समज पाए हो जब 
जो सबसे अज़ीज़ पल था हमारे जीवनके 
उन हर पल के साथ सिर्फ मेरा  ही नाम जुड़ा था .....
अब इल्तजा करते है हमें 
इन सितारोंसे पयगाम भी हम पाते है 
ये पता तुम्हारा हम आसमानों पर लिखा पाता है 
ये कहते हुए कि फिर हमारी दुनियामें एक बार लौट आओ ............

1 टिप्पणी:

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...