9 दिसंबर 2011

बेहद खुश ........

दूर दूरसे काले साए चले आ रहे थे ,
लगता था बहुत बड़ा हुजूम है ,
मुझे लगा इसे चीरकर जाना है ,
अंधकार और उजालेके बीच भी जंग छिड़ गयी थी ,
अँधेरा धक्के देखर उजालेको बाहर कर रहा था ,
उजालेको भी जिद्द थी वो न हटेगा पीछे कभी ,
काले काले साए लम्बी सड़क पर चले आ रहे थे .....
पीछेसे चली आ रही थी कारें लगातार ...
उनसे पता चलता था की ये साए लगातार कहीं जा रहे थे ....
बस चलते गए यूँ लगातार ,
एक दो एक दो करके साए पाससे गुजर जाते थे ,
और मेरे अंतिम पड़ाव पर हर साए से परे ,
वो ही अकेली सी मैं ,
सड़कके किनारे बैठी हुई ,
देख रही थी अँधेरेकी हार और उजालेकी जीतको ...
मुस्कुराकर हर साए को चीर हम दोनोंही खुश थे ....
बेहद खुश ........

6 टिप्‍पणियां:

  1. आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
    प्रस्तुति आज के तेताला का आकर्षण बनी है
    तेताला पर अपनी पोस्ट देखियेगा और अपने विचारों से
    अवगत कराइयेगा ।

    http://tetalaa.blogspot.com/

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुस्कुराकर हर साए को चीर हम दोनोंही खुश थे ....
    बेहद खुश ........सकारात्मक !!

    उत्तर देंहटाएं

विशिष्ट पोस्ट

मैं यशोमी हूँ बस यशोमी ...!!!!!

आज एक ऐसी कहानी प्रस्तुत करने जा रही हूँ जो लिखना मेरे लिए अपने आपको ही चेलेंज बन गया था । चाह कर के भी मैं एक रोमांटिक कहानी लिख नहीं पाय...