21 अक्तूबर 2011

क़यामत गुजर जाए ...

शायद ये रात है क़यामत गुजर जाए ,
एक पल सांस थम जाए और हम जिन्दा रह जाए ......
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तुम पर क्या गुजरी होगी 
जब तुम्हारा नाम न होठो पर आ सका ,
पहचान तो जन्मो की थी 
और वो फ़साना अधुरा ही रहने लगा .....
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मेरे दिलके ज़ख्म गिनके क्या होगा हासिल ,
दर्द तो बस एक ही था की तुम मुझे मिल न सके ........
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कहाँ कोई नाम पता पूछकर आती है वो 
बस एक ख़ुशी तो है जो बिनबुलाये बिन बताये चली आती है .....

3 टिप्‍पणियां:

  1. शायद ये रात है क़यामत गुजर जाए ,
    एक पल सांस थम जाए और हम जिन्दा रह जाए ......
    ====================================== very nice...

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  2. तुम पर क्या गुजरी होगी
    जब तुम्हारा नाम न होठो पर आ सका ,
    पहचान तो जन्मो की थी
    और वो फ़साना अधुरा ही रहने लगा .....bhaut hi khubsurat.... happy diwali...

    उत्तर देंहटाएं

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