12 सितम्बर 2011

धूपका कोना....

खुशबू को कैद करके एक बोतलमें 
फूलोंको तडपता छोड़ दिया क्यों ?
वो फूलोंकी लाश पर देखो 
इन्सानोके काफिले जा रहे है !!!!
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धूपका कोना नज़र आता है
एक गहरी काली रातमे 
जो दिनका महोरा पहेनकर आया था 
जब बुझ गयी शमा तो ख्याल आया
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क़दमोंके निशानमें एक शक्ल नज़र आई 
पुराने संदूकमें जैसे ताज़ातरीन नज़्म लिखी नज़र आई

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