30 जुलाई 2011

कब लौटोगे ???

वक्त के सितमको क्या कहें ???


हसीं ख्वाब दिखाकर छोड़ जाता है ,


हम दो राहे पर खड़े उसके इंतज़ारके लम्होंको


सहजते हुए बस इतना ही कहते है ,


कब लौटोगे ???


कहाँ पर मिलोगे ???


कैसा रूप होगा तुम्हारा रूप ???


तुम मुझे कैसे पहचानोगे ??


बस सवाल पर सवाल लिखते चले जाते है हम ,


और वक्त चुपके से जवाब लिखकर चला जाता है जिंदगीकी किताब पर ......


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