12 जुलाई 2011

वो मय थी

एक पयमानेसे मय जाने कहाँ गुम हो गयी ???

लगता है ये तो बुँदे बनकर बादलमें घुल गयी !!!!!!!

छलक पड़ी जब बादलोंकी हँसी बिजलीके रूप में कहीं !!

ये मय फिर बरसकर मेरा पयमाना भर गयी ,

वो शराबथी जो तुम्हारी आँखोंसे छलक रही थी ,

वो मय थी जो तम्हारी झुल्फोंसे टपक रही थी ..........

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