7 मई 2011

आयनेसे बहते हुए ...

आयनेसे बहते पानी के नीचे दीखते हुए
वो छोटे छोटे कंकर ,
कितने शांतिसे बैठे है ?
जैसे ध्यानमें बैठे योगी ....
रंग सिमटकर पथ्थरो पर बिखरे हुए ,
हमेशा धुलते हुए ,
हमेशा साफ़ ,
हमेशा पाक ,
कुछ सीपियोंको छुपाये ,
कुछ शंख को बजाते ,
बैठे हुए ऐसे ,
दुनियादारी की कोई चिंता ही ना हो जैसे .........

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