24 जनवरी 2011

शामोसहर

कभी सहरसे शामकी मुलाकात तो होती
बतिया लेते दोनों क्या गुजरी उन पर भी .....
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सूरज जल जाता है सालोंसे
फिर भी खाक नहीं हुआ ...
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दिन को नींद ना आती हो इंतज़ारमें रातके
रात भी बेखबर जगती रहती है सुबहके इंतज़ारमें ....

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