7 अप्रैल 2010

यादों की वादियाँ

यादोंमें कैद बुलबुलके गाने
तरस गये उसके बोल को ...
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सतरंग चुनर यादोंकी
मैलीसी लागे जब दर्द की कसक जागे ...
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हर फूल खिल जाए मनके आँगन
जब कोई मेरी यादोंमें मुस्कुरा जाए हौले से ....
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बचपन फिर यादों के झरोखोंमें
मीठी मुस्कान बिखेर रहा पाया
एक झूले पर झूलते हुए हमने ...
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इश्क अभी भी ताज़ा महक लिए सहेज रखा है ,
मजबूर सही दूरीसे पर दूर नहीं तुम इस दिलसे ....
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2 टिप्‍पणियां:

  1. इश्क अभी भी ताज़ा महक लिए सहेज रखा है ,
    मजबूर सही दूरीसे पर दूर नहीं तुम इस दिलसे ....
    ''bahut sundar

    http://kavyawani.blogspot.com/

    shekhar kumawat

    उत्तर देंहटाएं
  2. बचपन फिर यादों के झरोखोंमें
    मीठी मुस्कान बिखेर रहा पाया
    एक झूले पर झूलते हुए हमने ..


    बचपन के यादो का अपना अन्दाज होता है ।

    उत्तर देंहटाएं

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