10 दिसंबर 2009

सच .....बस .....

एक सच ....

जिसे सुनने तरस जाते है ये कर्ण पटल मेरे ,

पर जब सुने तो दिलोदिमाग पर दरारे पड़ जाती है .......

कोई सच दुनियाकी सारी खुशियाँ समेटकर ला सकता है ...

कोई सच बनता है एक सपना तो हमें जिन्दा बना जाता है ...

कोई सच बसी बसाई दुनिया उजाड़ सकता है ....

कोई सच बनते बनते सपना बूढा हो जाता है ....

कोई सच सपना पुरा होनेकी राहमें दम तोड़ जाता है ....

सच दूसरोंके बारेमें बताना बड़ा आसान होता है ....

पर अपने सचको आयने में देखना भी सबसे मुश्किल हो जाता है .....

बस ढूंढते जाओ राहों पर तो भी इस दुनिया में

चेहरों पर सच दिखाई देना मुश्किल हो जाता है .......

2 टिप्‍पणियां:

  1. preeti ji ........aajkal aap bahut hi gahan likh rahi hain........ek naya hi andaz hai ...........bahut sundar.

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  2. मैं भी वंदना जी से एक मत हूं।
    बस ढूंढते जाओ राहों पर तो भी इस दुनिया में
    चेहरों पर सच दिखाई देना मुश्किल हो जाता है .......

    उत्तर देंहटाएं

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