29 दिसंबर 2009

एक जश्न एक जाम ...

एक लम्हे को गिलासमें डाल और पीले ,

जिंदगी है बस यही पल में इसी को जी ले ,

कल ये कर ना पाए ये अफ़सोस न हो ,

जिंदगीके हर क़र्ज़ आज ही उतार ले .....

गममें साथ रहे जो हरदम उसकी खोज बिन कर ले ,

मिल न पाए कुछ नहीं एक पाती लिख दे या फोन तो कर ले ....

कलकी जिंदगी पर रोता है क्यों ?

जो देखा नहीं आया नहीं उस पर इतना सोचता है क्यों ?

कल की गलती आज सुधार ले और आने वाले कल को

आज ,अभी और इसी वक्त सुधार ले ......

दिल दुखाया हो जिसका भी मुआफी मांग ले ,

अपनी मुस्कराहट औरोंमें बाँट दे ...

जिंदगी है एक जाम इस में हो नशा या जहर या अमृत !!!

बस इसे तू पी ले और इस पलमें तो तू जी ले ....

2 टिप्‍पणियां:

  1. जिंदगी है एक जाम इस में हो नशा या जहर या अमृत !!!

    बस इसे तू पी ले और इस पलमें तो तू जी ले ...



    बहुत सही और गहरी बात....



    बहुत अच्छी लगी यह कविता.....

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  2. waah waah ...........bahut hi sundar khyal aur behad sundar baat.

    NAVVARSH KI HARDIK SHUBHKAMNAYEIN.

    उत्तर देंहटाएं

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