23 नवंबर 2009

तनहाई

कभी दोस्ती कर ली तनहाईसे तो ख़ुदसे दोस्ती हो गई ,

फ़िर कहीं ये तन्हाईयाँ गुम हो गई है ,

जिसके साथ न मिलते कभी उससे भी बात हो गई ,

बस एक अजनबीसे पहचान हो गई है ......

जब प्यार हो गया ख़ुदसे जिस दिन ,

ये दुनिया भी जैसे बदल गई है ,

कभी जो भला ना लागा था दिलको मेरे ,

वो ही आज हमारी पहली पसंद हो गई है .....

ग़मोंने जब थामा कभी दामन मेरा ,

इस तनहाईसे फ़िर मुलाकात हो गई है ,

आंसू पोछकर मेरे उसने अपने दामनसे

बस वो ही अब मेरी सहेली हो गई है .....

दस्तक ना देना कोई मेरे दरवाजे पर कभी ,

मुझे ख़ामोशी के मेलेमें जीनेकी आदत हो गई है ,

कभी इबादत करली है खुदा की तनहाई में ,

जब हम तुम मिले आज तनहाई में तो आज

इजहारे इश्क की भी गुस्ताखी हो गई है ....

2 टिप्‍पणियां:

  1. कल शाम तन्हा बैठ कर सोचा तेरे बारे में ...
    तो खुद पर हंसी आ गयी
    तू और तन्हाई ...मुमकिन ही नहीं ...

    यही तो कह रही है आप भी ...!!

    उत्तर देंहटाएं
  2. मुझे ख़ामोशी के मेलेमें जीनेकी आदत हो गई है ,

    कभी इबादत करली है खुदा की तनहाई में ,

    जब हम तुम मिले आज तनहाई में तो आज

    इजहारे इश्क की भी गुस्ताखी हो गई है ....
    waah kya baat badi hi dilkash romani nazm hai,sunder

    उत्तर देंहटाएं

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