18 अक्तूबर 2009

मथुरा वृन्दावन =पावन श्रीकृष्णधाम

मथुरा वृन्दावन !!!!

ये दोनों नाम सुनते ही हर आस्थावान का सिर श्रध्दा से जुक जाता है ।आँखों के आगे माखन चोर नन्हें नटखट कनैया से लेकर कुरुक्षेत्र में अर्जुन को गीता ज्ञान देते श्री कृष्ण की छवि राम जाती है ....

सौभाग्य से इस परम पावन भूमि पर दो बार मैं जा चुकी हूँ ...

इस वक्त की समग्र यात्रा का वर्णन मेरी १९८२ की यात्रा पर आधारित है ।जब मैं अपने माताजी और पिताजी के साथ गई थी .पिताजी ने बहुत ही अद्भूत और रोचक संस्मरण लिखा है जिसका हिन्दी में भावानुवाद आपके समक्ष पेश कर रही हूँ ,मेरी कलम आज विराम लेगी :

यमुनाजी के घाट पर विश्राम घाट पर आरती के दर्शन के लिए जाना यही एक अविस्मरनीयअनुभव है ।यमुना का नीर मट्टी से मिला हुआ था पर आस्था उन सबसे ऊपर है .यहाँ पर अधिक गुजराती यात्री आने के कारण यहाँ के चौबे ,महंत , गाईड सभी शुद्ध गुजराती भाषा में बातचीत करते थे ...

वासुदेव मध्यरात्रि को कृष्ण के जन्म के बाद इसी यमुना से गुजरकर सामने वाले किनारे गोकुल पहुंचे थे ये कल्पना जहन में साकार होने लगी ...

हाँ यही यमुना थी जहान पर कृष्ण ने कालीय नाग का दमन किया था ,वह ग्वालों के साथ खेले थे ।गोपियों की मटकियां फोडी थी ,माखन चुराया करते थे ...

द्वारकाधिश के बड़े मन्दिर में दर्शन करे ।बाज़ार बंद था .मन्दिर के मैदान में ही बैठ गए .बहुत ही प्राचीन मन्दिर पर इतना लुभावना !!इसके बड़े से घुम्मत पर श्री कृष्ण के जीवन प्रसंग चित्र स्वरूप में बनाये गए थे ...

दूसरा है कृष्ण जन्मस्थान का मन्दिर ।उसके पीछे एक मस्जिद बनी हुई है .कहा जाता है कौमी दंगो के दौरान दोनों ने एक दूसरे के धर्म स्थानों को सात बार नष्ट किया था .आख़िर कर सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ये मन्दिर बन गया . (२००५ में अति भव्य स्वरूप हमने दोबारा देखा .ये अति भव्य मन्दिर है जो हमें श्री कृष्ण जन्म के वक्त टी वी पर लाइव टेलीकास्ट में दिखाया जाता है ).उस वक्त डोंगरे महाराज ,बिरला और दाल मियां ने २२-२२- लाख रुपये दान में दिए थे .दूसरे दानों का तो कोई हिसाब नहीं ...

कृष्ण जन्म वाली जेल को यथा स्वरूप रखा गया है ।वहां पर मेरी ऑंखें अश्रु से भर गई . मेरा जीवन धन्य हो गया ...ये ऐसी जगह है जहाँ पर हम आस्था के साथ जाते है तो कृष्ण जन्म के समय को भी अनुभूत कर सकते है ...हमारा रोम रोम जैसे एक बिजली जैसे कंपित हो जाता है .... यहाँ से आधे घंटे की दूरी पर वृन्दावन है ।पुरी जगह श्री कृष्ण लीला के साथ गूँथ ली गई है ।यहाँ पर गौ चराने वाले ग्वाले की लीला अब तक अमर हो चुकी है .वहां पर अनेक गौशालाएं है . यहाँ पर बूढी गायों का वध नहीं होता ,उन्हें पाला जाता है .मथुरा की बेटियाँ मथुरा में ही हो सके वहां तक ब्याही जाती है ...

वृंदावन है मंदिरों की नगरी ।अगर आप सप्ताह भर भी रुके तो मन न भरे .गाईड ने हमें मुख्य मन्दिर ही दिखाए ...

रुगनाथका मन्दिर ॥आगे बड़ा सा आँगन और विशाल कमाने ..अन्दर दाखिल होते ही कृष्ण भक्त मीरा बाई की मूर्ति जो डोल रही थी उसका सुंदर पुतला ।पीछे रेकॉर्ड बज रही थी "मेरे तो गिरिधर गोपाल दूसरो न कोई ..."

एक बेहद खूबसूरत जगह ।मीरा बाई के पदों की पंक्ति याद आती रही .जीवन से जिसे वैराग्य हो चला था वो कृष्ण में लीन हो चुकी थी .भक्ति जब दिल की गहरायिओं से जागती है तो मोह माया के सारे आवरण से मुक्ति मिल जाती है .जो प्रभु के शरण में जाता है उसका कोई कुछ बिगाड़ नही सकता .आज कृष्ण और मीरा कहाँ है ????रह गई है उनकी भक्ति की अमर गाथाएं ...

एक के बाद एक मन्दिर देखते चले गए ।हर जगह आराम से बैठ ने को दिल करता था लेकिन वक्त की पाबन्दी थी ...

वृंदावन के रस्ते बिल्कुल कुञ्ज गली कहलाने के लायक ही है ।संकरी गलियों में से होकर गुजरते रहो .यहाँ पर बांसुरी की धुन पर गोपियाँ कैसे दौड़ी होगी ! कैसे रासलीला करते होंगे कृष्ण !!! बस एक कल्पना ही आती रहती है . कहा जाता है अभी भी पूर्णिमा की रात को वृन्दावन के जंगल में कृष्ण का महारास होता है . जो उसे देखने की कोशिश करता है वह जिंदा वापस नहीं आता है ...

रस्ते में एक विधवा आश्रम भी आया । यहाँ निराधार २००० विधवाओं का पालन पोषण किया जाता है . उन्हें प्रातः थोड़ा काम करके पूरे दिन भक्ति में बिताना होता है .यहाँ पर दान भी मिलता रहता है ...

एक और दाउजीका बड़ा मन्दिर है जो भक्त गण के जाने पर खोला जाता है । अब तो २००५ में और भी कई सुंदर मन्दिर बन गए है पर वक्त की पाबन्दी फ़िर बिच में आ गई थी ...

श्री कृष्ण जिसका महात्म्य अब पूरे जगत ने स्वीकार किया है वहां पर जाने पर दोनों बार मैंने देखा अभी कोई परिवर्तन नहीं हुआ है । सरकार ने इन पुरी जगह के रखरखाव और धार्मिक और सांस्कृतिक गरिमा के हिसाब से कोई ध्यान नहीं दिया है . यहाँ जाने के लिए आस्था ही बड़ा काम करती है पर जगह की दुर्दशा को देख कर मन थोड़ा भारी हो जाता है ....

कल हमारा नव वर्ष है और फ़िर भाई दूज ...अब दो दिन के विराम के बाद मिलना होगा ...

आप सबके लिए आने वाला नव वर्ष हर खुशी लेकर आए ये मंगल कामना करते हुए ...

आप सबको मेरा नूतन वर्षाभिनंदन ......

3 टिप्‍पणियां:

  1. दिलचस्प संस्मरणात्मक विवरण

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  2. आपको भी नूतन वर्ष की शुभकामनाएँ.

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  3. aapne to is lekh ke madhyam se kuch kshanon ke liye jaise sakshat vrindavan mein bankey bihari ke darshan ki kara diye.........padhte waqt royein khade hone lage , aseem aanand ki anubhuti kara di..........shukriya.

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