देर आए दुरस्त आए ...दो दिन के बाद ही सही ये नवरात्री के नव दिन माँ दुर्गा के किस रूप को समर्पित है ये बात आज बताना चाहूंगी ...अगर श्लोक के लिखावटमें कुछ ग़लत है तो मैं क्षमा प्रार्थी हूँ .........
१...शैलपुत्री :
वन्दे वांछितलाभाय चंद्रर्धकृतशेखराम
वृषारुढं शूलधराम शैलपुत्री यशस्विनीम
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पहले दिन माँ दुर्गा का ये प्रथम स्वरूप को पूजा जाता है । पर्वताधिराज हिमालय के वहां जन्म होने के कारण उनका नाम शैलपुत्री रखा गया । इनका वहां वृषभ है .उनके दायें हाथ में त्रिशूल और बाएं हाथमें कमल है ।
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२...ब्रह्मचारिणी :
द्द्याना करपद्माभ्यामक्षमालाकमंडलम
देवी प्रसिदतुं मयि ब्रह्मचारिन्यनुत्तमाँ
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माँ दुर्गा के दूसरे दिन इस रूप को पूजा जाता है .ये माँ ध्यान के चारिणी है .इनका स्वरूप ज्योतिर्मय है और अत्यन्त भव्य है । इन के दायें हाथ में जपमाला है और बाएं हाथ में कमंडल है ....
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३...चंद्रघंटा :
पिण्डज प्रवरारूढाह चंडकोपास्त्रकैर्युता
प्रसादं तनुते मह्यं चन्द्रघंटेति विश्रुत
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माँ दुर्गा के ये तीसरे दिन का ये स्वरूप परम शान्ति दायक और कल्याणकारी है । मस्तिष्कमें घंट के आकार का अर्धचंद्र है ....वाहन सिंह है ,दस हाथ ,सुवर्ण रंगी शरीर , दस हाथ में अस्त्र शस्त्र ,घंट जैसे प्रचंड ध्वनी से अत्याचारी दैत्य को सदा के लिए प्रकम्पित रखने वाली ये देवी है ....
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४.... कुष्मांडा:
सुरासम्पूर्णकलशं रुधिराप्लुतमेवच
दधाना हस्तपद्माभं कुष्मांडा शुभदास्तुमे
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माँ दुर्गा के चौथे दिन का ये स्वरूप है ... आठ भुजा है , सिंह का वाहन है ,साथ हाथ में कमंडल ,धनुष ,बाण ,कमलपुष्प , अमृतपूर्ण कलश , चक्र गदा और सर्व सिध्धि निधि देने वाली जपमाला है ...
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५ ... स्कंदमाता :
सिंहासनगता नित्यंपद्माश्रितकरद्धया
शुभदास्तु सदा देवी स्कंदमाता यशस्विनी
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पाँचवे दिन का ये माँ दुर्गा का स्वरूप है .गोद में भगवान् स्कन्द विराजमान है ,चार भुजा कमल आसन पर विराजित और वाहन सिंह ही है । ये भगवान् स्कन्द कार्तिकेयके नाम से भी पहचाने जाते है ......
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६... कात्यायिनी :
चंद्रहासोज्ज्वलकरा शार्दूलवरवाहना
कात्यायिनी शुभं दद्यादेवी दानवघातिनी
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ब्रह्मा ,विष्णु और महेश को अपने तेज का अंश देकर दानव महिषासुरके विनाश के लिए इनको उत्पन्न किया गया जो माँ दुर्गा का छठे दिन का स्वरूप के रूप में पूजा जाता है ..महर्षि कात्यायन ने इनकी सौप्रथम बार पूजा अर्चना की इस लिए उन्हें कात्यायिनी के नाम से पहचाना गया है । इनका स्वरूप भव्य और दिव्य है ..चारभुजा है .ऊपर के हाथ में अभय मुद्रा ,निचे वरद मुद्रा है ,दायें ऊपर के हाथ में तलवार और निचे के हाथ में कमल सुशोभित है ....
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७...काळरात्री :
लम्बोष्ठी कर्णिकाकरणी तैलभ्यकिशारिरिणी
वामपादोल्लसल्लोहलताकंटकभूषणा
वर्धनमूर्धध्वजा कृष्णा कालरात्रीर्भयकुरी
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सातवा स्वरूप सातवे दिन माँ दुर्गा का इस नामसे पूजा जाता है । उनका देह गहरे अन्धकार जैसा ,गले में बिजली सी चमकती माला ,तीन नेत्र ,नासिका में से श्वास और उच्छ्वास में निकल रही अगनज्वाला ,वाहन गर्दभ है ..स्वरूप भयंकर है पर हमेशा शुभ फलदायी है ...सब को वर प्रदान करती है ....
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8...महागौरी :
श्वेतेवृषे समारूढा श्वेताम्बरधराशुची :
महागौरी शुभं दद्यान्महादेवप्रमोददा
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आठवे दिन का ये रूप माँ दुर्गा का इस नाम से पूजा गया है .. वर्ण सम्पूर्ण रूप से गौर है .उपमा शंख ,चंद्र और मोगरे के फूल की उपमा दी गई है ...इनकी उम्र आठ साल की मानी गई है ...चार भुजा है .समस्त वस्त्र और आभूषण श्वेत है । वाहन वृषभ है ...
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९ ...सिध्धिदात्री :
सिध्धगंधर्वपक्षाधैरसुरैरमरैरपि
सेव्यमाना सदाभूयात सिध्धि दा सिध्धिदायित्री
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माँ दुर्गा का ये नौवा और आखरी रूप है । ये सर्व सिध्धि देने वाला स्वरूप है । मार्कंडेय पुराण के अनुसार अनिमा ,महिमा ,लघिमा ,प्राप्ति ,प्राकाम्य ,ईशित्व ,और वशित्व ये आठ प्रकार की सिध्धि है ...ये सिध्धि दात्री आखरी है । उनकी उपासना करने के बाद साधक की हर लौकिक और परालौकिक हर कामना की पूर्ति होती है .और कोई कामना पूर्ण होने के लिए शेष नहीं रहती ....दुनयवी चीजें उनके लिए मायने नहीं रखती ....
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