5 जुलाई 2009

इन्तहा इंतज़ार की ....

हमें आदत थी इंतज़ार करने की

उन्हें इंतज़ार करवाने की आदत थी

इस बार उनका इंतज़ार बन जाएगा उम्रभरका

जो फूल लेकर आयेंगे पेश करने वो हमारी कब्रको नसीब होगा .......

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हमने एक नई दुनिया बसा ली है अब आपका इंतज़ार करते हुए

कुछ नए अहेसास का आलम रहा इंतज़ार का मज़ा लेते हुए

अब तुम्हे मिलने का लुत्फ़ भी कम सा लगता है

जो मज़ा आता है तुम्हारा इंतज़ार करने में .............

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इंतज़ार करते हुए एक नई दुनिया किसीने बसा ली

इंतज़ार करते हुए ख्वाबों की दुनिया किसीने सजा ली

इंतज़ार करते हुए सब कुछ कोई पा जाता है

इंतज़ार करते हुए कभी महबूबाकी डोली उठ जाती है .........

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इंतज़ार करते हुए हम तो नहीं रूठे कभी आपसे

आज हमारा आ न पाना आपको क्यों ना गवार गुजरता है ?

तडपाने का लुत्फ़ लेते रहे आज तक आप भी

तड़पने की सूरतमें हमारा प्यार ही आपको जूठ लग रहा है ?

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हमने तो हर वादा निभाया बड़ी शिद्दत से जो आपसे किया

हमने तो हर जखम सह लिया जो आपने हमें दिया

हमने तो इंतज़ार भी कर लिया आपका आखरी साँस तक

अब इंतज़ार बन गए हम आपके लिए उम्र भर का किस्मतसे ............

1 टिप्पणी:

  1. यकीनन यह इंतज़ार भी बेहद खूबसूरत रहा होगा, उनकी तरह

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