9 जून 2009

कहाँ है ? ख़ुद देखें ....

मेरे ख्वाब ...मेरे सपने ....पलकोंमें सजाकर रखे है ,

टूट जाना इनकी फितरत नहीं ,ये मेरी हर साँसमें समाये है ,

जब खुलती है मुंदी हुई पलकें ,वे दिलकी दिवार पर ख़ुद को तराश जाते है ,

और फ़िर इन ख्वाबोंकी ताबीर जुनूं बनकर जिंदगी का मकसद बन जाते है ........

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तुम्हे तनहा कभी छोड़ा नहीं है जरा झांककर देख लो एक पल ,

मेरे ख्याल मेरे सपने तुम्हारे सपने बनकर हर कदम साथ है .......

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