1 मई 2009

दिलके अन्दर झांककर देखा जरा

आयनेके बाजूमें एक खुली हुई खिड़की है ,

जहाँ से कभी सर्द कभी गर्म हवाएं मुडी है ....

एक नजर जी भरके देख लिया आकाशके परिंदेको ,

मन भी उड़ चला और देखो मेरा चेहरा खुश हो चला ......

ख़ुशी को पा लिया लम्हे भर के लिए सही ,

दिलकी ख़ुशी होठों पर झाँखने लगी .......

आयनामें खड़ी वो मेरी परछाई भी ,

तहे दिल से मुस्कुराने लगी ....

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